“पप्पी भैया प्रसिद्धी प्रसिद्धि का कोई कारण तो
होना चाहिये। आप ‘राष्ट्रीय’ प्राणी हो नहीं। बहादुरी या बलवान की मिसाल आप नहीं।
आपके कौशल विकास के प्रशिक्षण कार्यक्रम तक आयोजित नहीं किये जाते। अल्पसंख्यक आप
नहीं। तो इतना हंगामा क्यों है।”
तबेले के पास बैठे कुत्ते से भैंस अपना दुखड़ा रो
रही है। भैंस गुस्से में है। उसका बस चले तो पीछे की दो टांग मारकर गाय का नीचे का
जबड़ा तोड़ दे।
“ बात आज की नहीं है। मैं बरसो से देखती आ रही
हूँ। श्राद्ध हो तो गऊ माता। क्रिया हो तो गोदान। और तो और वैतरणी पार करनी हो तो
गोमाता की पूंछ पकड़ लो, बीमारी में गोमूत्र पियो। अरे हद ही हो गयी। और भोली ऐसी
बनेगी की जानती कुछ नहीं”
‘अब बोलेगी कुछ या जुगाली ही करती रहेगी।’
गाय को पता है कि हवा का रुख उसकी ओर है। गाय के
लिये यह नई बात नहीं है। वो यह भी जानती है कि हवा बदलने से हालात नहीं बदलते। दूध
न दे पाने पर उसके साथ भी वो ही होगा जो भैंस के साथ होगा।
इसीलिए गाय चुपचाप अपनी जुगाली कर
रही है ।
‘देखा बस देखती रहेगी टुकुर-टुकुर। बोलेगी कुछ नहीं।’
‘अरे कल्लो तू भी बस!!!

अरे गाय दुधरु पशु है। अगर गाय ही न रही तो हम तो
दूध-ड्बल रोटी के लायक ही न रहेंगें’। पप्पी जानता है इन
सभा-गोष्ठियों से कुछ होने वाला नहीं है। उसे गाय या भैंस से भी कोई सरोकार नहीं।
उसे अपनी छवि साफ रखनी है और अपने फायदे पर नज़र रखनी है।'
'अरे वाह रे मेरे श्वान प्रसाद!! जैसे हमारे थन
में से तो पानी निकलता होगा।'
‘न री कल्लो पाने देने के लिये तो भगवान ने हमारे
थन लगाये हैं।’ बकरी और ऊँटनी अपनी खीज रोक न पायीं और एक साथ बोली।'
'तो और मैं क्या कह रही हूँ?आखिर इस गाय में ऐसा
क्या है जो मुझ में या तुम में नहीं।'
गाय अब भी चुपचाप जुगाली कर रही
है।
'अरे हमे तो सारा जीवन हो गया देखते-देखते। बच्चे
निबंध याद करते हैं गाय का। कभी किसी ने भैंस पर निबंध या कविता लिखी है।’ कल्लो
आज बहुत गुस्से में है। पप्पी ने कुछ कहने का प्रयास किया – ‘कल्लो उसकी ओर देख करुणा से भरी उसकी आँखे
देख। कैसा निरीह जीव है।’
‘वाह भई वाह। वो निरीह जीव और हम खूंखार
जानवर!!!............पप्पी महाराज आप को पता न हो तो बता दूं घास एक जैसी ही खाती हैं हम दोनों और गोबर भी एक-सा ही हगते
हैं हम दोनों। जो व्यवहार इसके साथ होना चाहिये वो ही मेरे साथ भी।’
बकरी और ऊँटनी भी बोली ‘हमारे साथ भी।’
गाय बिना
कुछ बोले चुपचाप जुगाली कर रही है।
ठीक उस समय जब सभा निष्कर्ष पर थी तभी एक
महानुभाव ने सभा में बिना अनुमति के प्रवेश कर अपने हाथ में पकड़ी रोटी को इस तरह
उछाला की रोटी सीधे गाय के खूंटे के आगे गिरी। गाय देख ही रही थी कि पप्पी रोटी
उठा कर भाग गया।
गाय उसे देखती रही और चुपचाप
जुगाली करती रही है।