हमारे पीस
वाले बाबा जी मज़हब को रिसर्च का विषय मानकर उसमें से साइंटिफिक बातें और जज़्बातों
को अलग करते हैं| कोशिश होती है कि लोग मज़हब को समझ कर
उस पर अमल करें| पर मियां लोग ऐसे नामुराद हैं कि वही पकड़ते हैं जो पकड़ना चाहते हैं| अब अगर कहा जाए कि लादेन की तरह बनो तो उसका मतलब ये
थोड़े है कि आतंकवादी बनो उसके मायने तो होंगे अपने अंदर इतनी कुवत्त पैदा करो कि अमेरिका जैसा मुल्क भी तुमसे
डरने लगे| अब मान लो कि अमेरिका की जगह कोई चीन
(पाकिस्तान और बंगलादेश तो हमारी अपनी औलाद ठहरे) के ऊपर बम गिराने वाला आ जाए तो
क्या वो हमें प्यारा न होगा| ये तो नू कही थी कि लोग दुश्मन मुल्क को
धमकाने-डराने के लिए आगे बढ़ेंगे|
मान लो चीन को डराने
के लिए इस देश से एक लादेन हो
जाता तो क्या इस
दुनिया में पीस न बढ़ती| ऊपरवाला बड़ा गर्क करे इन मीडिया वालों का मजहबपरस्त और वतन परस्त लोगों का नाम
खराब करती है| अजी! तहरीर करने वाला जोरदार हो तो कौन प्रभावित नहीं
होता| दो–चार नौजवानों में जोश आ गया तो हमारा कसूर है क्या? अरे
लौंडों को आ गया जोश तो कर बैठे नादानी| अमां यार! कोई हमारी मीठी बोली को छोड़कर
सीधे दिल की आवाज़ सुन ले तो ये उसकी काबलियत है या हमारी शरारत| जनाब इस बार तो ‘सेकुलर’ लोगों
ने भी साथ छोड़ दिया| उन पर तोहमत क्यों लगाएं हमारे तो अपने ही कहते हैं
कि पीस वाले अशांति फैला रिये हैं| चलती हुई दुकनदारी देखी नहीं जाती किसी
से| हमें कट्टर बता रिये हैं| मैं कहता हूँ हमें कट्टर बताने वाला है कट्टर| खुदा दोज़ख़ में डालेगा हमें कट्टर बताने वालों को ........
कट्टर कट्टर सब करें कट्टर बुझे न कोय |
जो खुद की कट्टरता देखे कट्टर काहे होय ||
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