Sunday, 10 July 2016

PEACE वाले बाबा जी


      
हमारे पीस वाले बाबा जी मज़हब को रिसर्च का विषय मानकर उसमें से साइंटिफिक बातें  और  जज़्बातों को अलग करते हैंकोशिश होती है कि लोग मज़हब को समझ कर उस पर अमल करें| पर मियां लोग ऐसे नामुराद हैं कि वही पकड़ते हैं जो पकड़ना चाहते हैं| अब अगर कहा जाए कि लादेन की तरह बनो तो उसका मतलब ये थोड़े है कि आतंकवादी बनो उसके मायने तो होंगे अपने अंदर इतनी कुवत्त पैदा करो कि अमेरिका जैसा मुल्क भी तुमसे डरने लगे| अब मान लो कि अमेरिका की जगह कोई चीन (पाकिस्तान और बंगलादेश तो हमारी अपनी औलाद ठहरे) के ऊपर बम गिराने वाला आ जाए तो क्या वो हमें प्यारा न होगा| ये तो नू कही थी कि लोग दुश्मन मुल्क को धमकाने-डराने के लिए आगे बढ़ेंगे| मान लो चीन को डराने के लिए इस देश से एक लादेन हो जाता तो क्या इस दुनिया में पीस न बढ़ती| ऊपरवाला बड़ा गर्क करे इन मीडिया वालों का मजहबपरस्त और वतन परस्त लोगों का नाम खराब करती है| अजी! तहरीर करने वाला जोरदार हो तो कौन प्रभावित नहीं होता| दोचार नौजवानों में जोश आ गया तो हमारा कसूर है क्या? अरे लौंडों को आ गया जोश तो कर बैठे नादानी| अमां यार! कोई हमारी मीठी बोली को छोड़कर सीधे दिल की आवाज़ सुन ले तो ये उसकी काबलियत है या हमारी शरारत| जनाब इस बार तो सेकुलरलोगों ने भी साथ छोड़ दिया| उन पर तोहमत क्यों लगाएं हमारे तो अपने ही कहते हैं कि पीस वाले अशांति फैला रिये हैं|  चलती हुई दुकनदारी देखी नहीं जाती किसी से| हमें कट्टर बता रिये हैं| मैं कहता हूँ हमें कट्टर बताने वाला है कट्टर| खुदा दोज़ख़ में डालेगा हमें कट्टर बताने वालों को ........

कट्टर कट्टर सब करें कट्टर  बुझे न कोय |  
जो खुद की कट्टरता देखे कट्टर काहे होय ||

 


 


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