साहब आदमी को टेंशन बहुत है| अपनी तो है ही दूसरे की भी है| जिसके पास अपनी कम है उसने दूसरे की किराए पर ले रखी है बल्कि जिसके पास अपनी रखनी की जगह नहीं है उसने भी इधर-उधर की लेकर अपने पास भर रखी है|
मेरे एक परम मित्र, जो आयु में मुझसे ढाई गुना हैं, उन्हें इस बात की टेंशन है कि लोगों को पेंशन के लिए बहुत धक्के खाने पड़ते हैं| लेकिन इस टेंशन से त्रस्त होकर भी वो किसी जरूरतमंद के लिए आवेदन लिखने या किसी अनपढ़ के साथ बैंक जाने वालों में से नहीं हैं| उन्हें लगता है कि सिस्टम को कुछ सरल होना चाहिए जिससे गरीब और अनपढ़ लोग पेंशन योजनाओं का तवरित और भरपूर लाभ उठा सकें| इसके लिए उन्होंने आधा दर्जन उपाय भी ढूंढ निकाले हैं| असल में सोचना जितना आसान काम कुछ नहीं है| जब हम कुछ नहीं करना चाहते तब हम सोच-सोच कर ही अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं| मेरे मित्र सज्जन आदमी हैं जो समाज का भला सोचते हैं लेकिन मात्र सोचते हैं| मैं उनके व्यक्तित्व का छिद्रान्वेषण करके उन्हें झक्की सिद्ध करने से पहले आपके सामने कुछ सिचुएशन क्रियेट करने का जोखिम उठाना चाहाता हूँ|
सिचुएशन 1 – आपकी पत्नी कामकाजी महिला है और आपको लगता है कि उसके कार्यस्थल पर वह कुछ ज्यादा सिंसियर कर्मचारी है या बनने के लिए घर-परिवार से समझौते कर रही है/ वह अपने काम के प्रति लापरवाह है और उसके कार्यस्थल पर उसकी छवि अच्छी नहीं है| दोनों स्थितियों के बारे में आप क्या करेंगें?
सिचुएशन 2 – आपके बेटे/बेटी की क्लास में टीचर एक विषय को ठीक से नहीं पढ़ा रहा जिस विषय में आपको महारथ हासिल है| बालक ने इसी विषय की ट्यूशन भी लगा रखी है| फिर भी विषय पर उसकी पकड़ वैसी नहीं बन पा रही जैसी आप चाहते हैं| आप क्या करेंगें?
सिचुएशन 3 – आपके ऑफिस में आपके काम को वैल्यू नहीं किया जाता। जिनको कुछ नहीं आता बॉस उन्हीं को प्रमोट करता है। आप tense रहते हैं और switch करना चाहते हैं।
सिचुएशन 3 – आपके ऑफिस में आपके काम को वैल्यू नहीं किया जाता। जिनको कुछ नहीं आता बॉस उन्हीं को प्रमोट करता है। आप tense रहते हैं और switch करना चाहते हैं।
अरे भाई अपनी टेंशन छोड़नी है तो पहले ये तो तय करो की ये 'अपनी' है भी या नहीं। बीवी की टेंशन बीवी की है बच्चे की टेंशन बच्चे की है। अमा यार 'अपनी' टेंशन को कम से कम अपने पास तक आने तो दो, आप तो खुद ही उसके गले लगने के लिये उतावले हुए जाते हो।
बीवी के कार्यस्थल पर छवि कैसी है इससे आपको क्या! जो नौकरी करने की समझ रखती है वो इस बात की भी समझ रखती होगी कि उसने कब कहाँ कैसा व्यवहार करना है। अगर कर सकें तो बस घर के साथ सामंजस्य बैठाने में उसकी थोड़ी मदद कर दीजिए। इसी तरह अगर बच्चे को पढ़ाने के लिए कुछ समय निकाल पाएं तो ठीक है और अगर न भी निकाल पाएं तो परेशान क्यों होते हैं आखिर मेहनत भी तो इसलिए कर रहे हैं कि उस पढ़ा सके, अच्छा जीवन दे सकें। अब तीसरी समस्या। ये बहुत कॉमन है। अगर नौकरी छोड़ने के कारण ये ही हैं तो यकीन मानिए ये समस्या नयी नौकरी में भी मिलेगी। किसी भी नौकरीपेशा आदमी से बात कीजिए ये ही कहेगा 'नौकरी' शब्द में ये भाव अंतर्निहित हैं।
इसलिए टेंशन वेंशन क्यों लेते हो जाने जाना
चार दिन की जिंदगानी मुस्कुराना ...
चार दिन की जिंदगानी मुस्कुराना ...
टेंशन कम करने का मंत्र यही है कि परिवेश बदलने की बजाए खुद को बदलिए , दूसरे की टेंशन मत लीजिए बाकी बची अपनी वो तो आप सम्भाल ही लोगे। वैसे कोशिश करें कि बहुत सोचने की बजाए कुछ थोड़ा सा भी 'करें' तो बेहतर होगा।
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