ये भी कोई बात हुई। आखिर एक भी नहीं बचना चाहिए था योग से। जो बच गए हैं वो दुनिया मेँ बचे ही क्यों हैं? भारत में तो इन जैसों को रहने का अधिकार ही नहीं है। आखिर स्वास्थ नाम की भी कोई चीज़ होती है। आलसी लोग इतिहास को कभी नहीं समझ पाएंगे न ही योगा की उपादेयता को। वो तो भला हो मिडिया का जिसने सुबह शाम चिल्ला चिल्ला कर बताया कि योग तन और मन को शांत रखने का एक मात्र साधन है।
सभी आलसी समाज का निवेदन है कि21 जून बीत चुकी है अब मीडिया बंधु, परिवार जन और स्वयंभू योगगुरुओं से कृपया अब आलसियों को सोने दें।
सभी आलसी समाज का निवेदन है कि21 जून बीत चुकी है अब मीडिया बंधु, परिवार जन और स्वयंभू योगगुरुओं से कृपया अब आलसियों को सोने दें।
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ReplyDeleteब्लॉग लिखने में भी मेहनत की होगी ?
ReplyDeleteयोग के शोर में नींद कहां ???
ReplyDeleteजरूर।
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