Sunday, 9 August 2015

कलाम को पढ़ाते हुए



सन 2025 में मैं डॉ. ए.पी.जे अब्दुल कलाम के बारे में पढ़ा रहा हूँ।
 

क्लास का एक मेधावी बालक पूछता है।
छात्र : सर ! डॉ. ए.पी.जे अब्दुल कलाम महान व्यक्ति क्यों थे?

मुझे ये प्रश्न अजीब लगा। उसने कुछ और स्पष्ट किया ‘सर डॉ. कलाम राष्ट्रपति थे इसलिये महान थे। वे एक महान वैज्ञानिक थे? या वे एक महान चिंतक थे?’

मैं ऐसे प्रश्न के लिये तैयार नहीं था। प्रश्न गंभीर था। मैंने भूमिका बनायी। ‘बेटा, मुझे उनसे मिलने का सौभाग्य मिला था। उनसे मिलना एक अभूतपूर्व अनुभव था। मेरी रोम-रोम रोमांचित हो उठा था’। बात ने लय पकड़ी ही थी कि एक नालायक बोल पड़ा ‘ अरे सर हेयर स्टाइल देख कर हिल गये थे क्या!!??’ मैंने कहा अरे मूर्खानन्द महान लोगों का लाइफ स्टाइल देखते हैं हेयर स्टाइल नहीं। अरे वो जब बोलते थे तो लगता था कि साधारण से साधारण आदमी दुनिया जीत सकता है।

‘गुरु जी आप भी घुमा रहे हो। अरे Motivational speaker  थे क्या?’

‘नहीं बच्चों वो तो खुद मोटीवेशन थे I’

 

‘कोई जन आन्दोलन किया- करवाया था क्या?’

’नहीं कोई आंदोलन तो नहीं किया परंतु राष्ट्रसेवा को ही अपना सब कुछ मान चुके थे। उन्होंने जो भी काम किया निजी स्वार्थ के वशीभूत नहीं बल्कि मिशनरी भाव से किया I’   

 
‘कोई NGO चलाते थे क्या?’

‘नहीं बिटिया। वो सरकारी नौकरी करते थे। वैज्ञानिक थे I’


‘..........................’

मैं हर तरह से समझाने का प्रयास करता हूँ पर चूक जाता हूँ। कितना कठिन ही किसी साधारण व्यक्तित्व की असधारणता समझाना। मैं भी इस उम्र में कहां समझ पाया था गांधी की महानता को। पर मैं हार नहीं मानूंगा क्योंकि मैंने कलाम सहाब से वादा किया था कि मैं तुम्हारे जैसे हज़ारों कलाम बनाऊँगा.....................

 

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