ये 'Quarantine' क्या होता है ? शोले फिल्म में ऐसा ही एक संवाद था| एक हफ्ता पहले कितने ही 'देहातियों' ने मुझसे उसी शैली में ये सवाल किया| 😊

Quarantine (क्वारंटीन/क्वारंटाइन) शब्द बार-बार प्रयोग हो रहा है| कोरोना का प्रसंग हो तो मीडिया के अंग्रेजी और हिन्दी, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक सभी हलकों में इस शब्द की धूम है| Oxford Dictionary के अनुसार इसका शाब्दिक अर्थ है ‘a period of time when an animal or a person that has or may have a disease is kept away from others to prevent the disease from spreading.’ इस शब्द की उत्पत्ति इटली भाषा के Quarantina से मानी गयी है जिसका अर्थ है ‘चालीस दिन’ या Quaranta अर्थात चालीस| जिस सन्दर्भ में इसका प्रयोग किया जा रहा है उसमें इससे सटीक शब्द नहीं हो सकता| शब्द ‘Isolation’ भी देखने को मिला लेकिन इसमें ‘अलग होने’ या ‘एकाकीपन’ का भाव है परन्तु उसका कारण बीमारी है ऐसा नहीं स्पष्ट होता| हिन्दी में इसके लिए क्या शब्द प्रयोग किया जाए| शब्दकोष में इसके लिए ‘संघरोध’ शब्द का प्रयोग है| आप कहेंगे इसे कौन समझ पाता| पर पहली बार सुनकर ‘क्वारंटीन’ कितने लोग समझ पाए थे? ‘संघ’ और ‘रोध’ से मिलकर बना ये शब्द क्या आम भारतीय के लिए समझना बहुत कठिन है| सभी जानते हैं कि ‘संघ’ से तात्पर्य ‘संगठन’, ‘समूह’ से हैं जबकि ‘रोध’ प्रत्यय वाले प्रतिरोध और गतिरोध मीडिया में पहले से ही प्रचलित हैं| प्रिंट मीडिया वाले के लिए भी ‘क्वारंटीन’ से अधिक उपयुक्त ‘संघरोध’ होता क्योंकि यह कम जगह घेरता| फिर ‘क्वारंटीन’ शब्द के प्रयोग के पीछे क्या कारण हो सकता है?
Quarantine (क्वारंटीन/क्वारंटाइन) शब्द बार-बार प्रयोग हो रहा है| कोरोना का प्रसंग हो तो मीडिया के अंग्रेजी और हिन्दी, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक सभी हलकों में इस शब्द की धूम है| Oxford Dictionary के अनुसार इसका शाब्दिक अर्थ है ‘a period of time when an animal or a person that has or may have a disease is kept away from others to prevent the disease from spreading.’ इस शब्द की उत्पत्ति इटली भाषा के Quarantina से मानी गयी है जिसका अर्थ है ‘चालीस दिन’ या Quaranta अर्थात चालीस| जिस सन्दर्भ में इसका प्रयोग किया जा रहा है उसमें इससे सटीक शब्द नहीं हो सकता| शब्द ‘Isolation’ भी देखने को मिला लेकिन इसमें ‘अलग होने’ या ‘एकाकीपन’ का भाव है परन्तु उसका कारण बीमारी है ऐसा नहीं स्पष्ट होता| हिन्दी में इसके लिए क्या शब्द प्रयोग किया जाए| शब्दकोष में इसके लिए ‘संघरोध’ शब्द का प्रयोग है| आप कहेंगे इसे कौन समझ पाता| पर पहली बार सुनकर ‘क्वारंटीन’ कितने लोग समझ पाए थे? ‘संघ’ और ‘रोध’ से मिलकर बना ये शब्द क्या आम भारतीय के लिए समझना बहुत कठिन है| सभी जानते हैं कि ‘संघ’ से तात्पर्य ‘संगठन’, ‘समूह’ से हैं जबकि ‘रोध’ प्रत्यय वाले प्रतिरोध और गतिरोध मीडिया में पहले से ही प्रचलित हैं| प्रिंट मीडिया वाले के लिए भी ‘क्वारंटीन’ से अधिक उपयुक्त ‘संघरोध’ होता क्योंकि यह कम जगह घेरता| फिर ‘क्वारंटीन’ शब्द के प्रयोग के पीछे क्या कारण हो सकता है?
मीडिया में बहुत-सी बार ऐसी स्थिति आती है कि समाचार इतनी तेजी से आता
है कि समाचार चलाना प्राथमिकता होती है
उसके लिए जो भी ‘प्रचलित’ शब्द मिले, प्रयोग कर लिया जाता है| यहाँ ‘प्रचलन’ पद
विचारणीय है| ‘प्रचलन’ की प्रक्रिया को कौन समझ रहा है? कैसे समझ रहा है? इसके
केंद्र में पाठक/श्रोता है या पत्रकार/संपादक का निजी व्यवहारिक अनुभव| अनुभवी
संपादक समाचार की बारम्बारता (फ्रीक्वेंसी) और
उसकी ‘महत्ता’ के आधार पर उसकी शब्दावली में आवश्यक परिवर्तन कर सकते अथवा करते
हैं|
तो क्या दूसरी भाषा के शब्दों को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए?
बिलकुल किया जाना चाहिए| ऐसे शब्दों को जो लोक में रच-बस चुके हैं (जैसे सीलिंग,
मार्केट) या ऐसे शब्दों को जो नये विषय से जुड़े हैं और पारिभाषिक है लेकिन ऐसे
शब्द जिनके रूपांतरण मौजूद हैं और सर्वसुलभ हैं उन शब्दों को भी प्रयोग न करने का
क्या कारण हो सकता है? आखिर किस आधार पर यह आंकलन किया जा रहा है कि ‘क्वारंटीन’
आमजन को समझ में आएगा और ‘संगरोध’ नहीं आएगा| ऐसा भी नहीं दिखा कि किसी भारतीय
भाषा का कोई अन्य शब्द (‘एकांतवास’ सरीखा) को उन सन्दर्भों में प्रयोग करने का कोई
प्रयास किया गया हो? कुछ समय पहले मैंने इण्डिया टीवी के रजत शर्मा को हिन्दी
समाचार पढ़ते हुए ‘ब्रीच’ शब्द का प्रयोग करते हुए सुना| ये सुरक्षा में ‘ब्रीच’ का
मामला था| क्या इसके लिए ‘सेंध’ प्रचलित शब्द नहीं है? यहाँ विषय फिल्मी न्यूज़ या शेयर बाजार का नहीं है जहां
कुछ छूट अपेक्षित मानी जा सकती है| ‘सर्वाधिक पढ़ा जाने’ का दावा करने वाले हिन्दी
दैनिक अखबार आज ‘आइसोलेट’ और ‘क्वारंटीन’ जैसे शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं|
कोई भी शब्द उठाकर जनता के मुंह पर दे मारिये क्योंकि आपके पास मीडिया
की ताकत है और जनता की भाषा में गढ़े शब्दों की शक्ल आपको पसंद नहीं| ये आमजन के
ऊपर अंग्रेजी थोपना नहीं तो क्या है| कोई समझाये कि इसे मीडिया के द्वारा अपने
दायित्व की अनदेखी क्यों न समझा जाए|
मुझे लगता है कि पहले ये वायरस चाइना में फैला जहां या तो chines बोली जाती है या न्यूज इंगलिश में देनी होती है उसके बाद ये वायरस ज्यादातर युरोपिय देशों में फैला जहां पर अंग्रेजी को अन्य भाषा पर वरीयता मिलती है जिसकी वजह से ये संघरोध शब्द का इंगलिश अनुवाद धीरे धीरे जब बाकी देशों में फैला तो उसे हिंदी भाषी देशों ने भी अक्षरशः उठा लिया क्योंकि ये भी आज का सच है कि हिंदी कि बजाय हिंग्लिश भारत में बहुत तेजी से पॉपुलर होती जा रही है।
ReplyDeleteबाकी ब्रीच की बजाय मीडिया जैसा ताकतवर माध्यम अगर सेंध जैसे चर्चित शब्द का इस्तेमाल करता तो ज्यादा अच्छा रहता जैसे जनता कर्फ्यू शब्द मीडिया द्वारा ही जनता को दिया गया है जो की बहुत ज्यादा चर्चा में भी है और उसे जनता द्वारा हाथो हाथ भी लिया गया है।
जी ठीक कहा आपने| कोशिश तो यह ही है कि हिंगलिश की लोकप्रियता में मीडिया की भूमिका को रेखांकित किया जाए|
Deleteबहुत सही विषय उठाया मित्रवर, किंतु मेरे विचार से भी इस संबंध में समय की मांग क्वारंटीन को ज्यों का त्यों प्रयोग अतरराष्ट्रीय मांग है ताकि इस संबंध में कोई गफलत न हो पाये किंतु ब्रीच जैसे शब्दों को हिंदी समाचारों बीच में ठूँस देना उन अंग्रेजी माध्यम के पत्रकारों की मजबूरी है जो व्यावसायिक मजबूरियों से ही हिंदी बोलते हैं। समाचार की जगह न्यूज़ का घुसड़ जाना सभी को सामान्य लगने लगा है शायद।
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